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राहुल के घोषणा पत्र के इस मुद्दे से कांग्रेस में मची खलबली-कलह, कई बड़े नेता नाराज..

नई दिल्ली। 2019 लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने अपने मेनिफेस्टो में न्याय, किसान बजट, महिला आरक्षण सहित विभिन्न घोषणाओं के जरिए जनता का हाथ थामने की कोशिश की है, लेकिन इसी घोषणापत्र में कांग्रेस ने देशद्रोह कानून बदलने की बात करके बीजेपी को हमलावर होने का मौका दिया है, बल्कि कांग्रेस के अंदर भी इस पर दो फाड़ है।

बीजेपी का आरोप है कि कांग्रेस देश के खिलाफ बात करने वालों का साथ दे रही है, जबकि कांग्रेस की चुनौती ये है कि पार्टी के नेता अब दबी जुबान में कहने लगे हैं कि बीजेपी को बैठे बिठाए इसका सियाशी फायदा हो सकता है। पार्टी के कई नेता अब दबी जुबान में इसके लिए पी. चिदंबरम को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। कुछ लोगों का ये भी मानना था कि जब बीजेपी राष्ट्रवाद को चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा बनाना चाह रही है ऐसे में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मुद्दे से छेड़छाड़ नहीं करना ही समझदारी थी।

यूपीए सरकार में विदेश मंत्री रहे एसएम कृष्णा ने भी कहा है कि, वर्तमान में राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर चुनौतियां हैं, उसको देखते हुए इस कानून में बदलाव खतरनाक होगा।

कांग्रेस के एक बड़े नेता की माने तो कांग्रेस घोषणापत्र कमिटी के प्रमुख पी. चिदंबरम पहले भी अपने निजी आर्टिकल्स के जरिए देशद्रोह कानून के खिलाफ लिखते रहे हैं, जिसे कांग्रेस ने कभी पार्टी की राय नहीं मानी। चिदंबरम ने घोषणापत्र प्रमुख होने के नाते इस मुद्दे को आखिरी वक्त में मेनिफेस्टो में शामिल करा लिया।

कांग्रेस के कई नेताओं ने घोषणापत्र आने से पहले पत्र लिखकर देशद्रोह कानून को मेनिफेस्टो में नहीं शामिल करने की मांग की थी। नेताओं की दलील ये भी है कि जब देश 370/ देशद्रोह का मुद्दा भूल चुकी है, ऐसे में कांग्रेस इसे मेनिफेस्टो में लाकर क्यों जिंदा कर दिया?

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