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भारत सरकार ने कल रात मूवी “Baby” जैसा कारनामा कर दिखाया, दूसरे देश से उठा लायी अपराधियों को..

कुछ साल पहले अक्षय कुमार की एक फ़िल्म आयी थी। नाम था ‘BABY’ जो भारत द्वारा दुबई में खुफिया तरीके से आतंकवादी को पकड़ने के प्लान को दर्शाती थी। भले ही वो ‘रील लाइफ’ की ज़िंदगी थी, इसके पश्चात भी ‘रियल लाइफ’ जी रहे लोगों के मन में ऐसी टीस थी कि हमारा देश सच में ऐसा कब करेगा? 

इतने साल के बाद अब भारत ने उसी कार्य को सच मे कर दिखाया है। भारत ने ऑगस्टा घोटाले में बड़ी कार्यवाही की है। इस घोटाले में सरकार  एक और बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। इसमें सम्मिलित दो लोगों को भारत लाया जा रहा है। इनमें से एक का नाम राजीव सक्सेना है तो दूसरे का नाम दीपक तलवार है। ये दोनों ही महानुभाव इस पूरे घोटाले के पैसे को मनी लॉन्ड्रिंग के जाल द्वारा काले से सफेद बना रहे थे। यह सब देख कर BABY फ़िल्म की याद आ गयी। 

दरअसल ऑगस्टा वेस्टलैंड घोटाले में क्रिश्चियन मिशेल की गिरफ्तारी के बाद यह दूसरी बड़ी खबर है जिसके बाद से भारत के सत्ता के गलियारों में बहुत बेचैनी महसूस की गई है। बहुत से नेताओं ने दबी ज़बान में ही सही, लेकिन अपने डर का इज़हार किया है। टीवी चैनलों पर भी इन दोनों व्यक्तियों का इतिहास खंगाला जा रहा है। इससे पिछली सरकार के सारे कांड सामने आ रहे हैं। यही कारण है कि इस एक गिरफ्तारी को उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है।

■ कौन है राजीव सक्सेना? 
दरअसल राजीव सक्सेना दुबई के एक व्यापारी हैं। राजीव सक्सेना और उनकी पत्नी शिवानी सक्सेना दुबई में तीन कंपनियों की निदेशक हैं। इसके साथ ही राजीव सक्सेना मॉरीशस की भी एक कम्पनी के निदेशक हैं। 

सितंबर 2017 में ED ने राजीव सक्सेना को ऑगस्टा मामलें में संदिग्ध पाते हुए उनके खिलाफ चार्जशीट फ़ाइल की थी। सक्सेना पर अगस्ता डील में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं। ईडी ने अपनी चार्जशीट में जिक्र किया है कि अगस्ता वेस्टलैंड में प्रभाव रखने वाले वकील गौतम खेतान ने फर्जी इंजीनियरिंग कॉन्ट्रैक्ट बनाकर रिश्वत के पैसे हासिल किए हैं। फिलहाल खेतान ईडी की हिरासत में है। इस मामले में सक्सेना खेतान के साथ आरोपी है। लंबी कार्यवाही के बाद अंततः राजीव सक्सेना को अपनी ज़मानत की अर्जी देने के लिए मजबूर होना पड़ा। पिछले महीने ही दिल्ली की अदालत में अंतरिम जमानत के लिए राजीव सक्सेना ने अर्जी डाली थी जिसका ED ने बड़ा विरोध किया था। अब राजीव सक्सेना का पकड़ कर भारत वापस लाया जाना ऑगस्टा वेस्टलैंड घोटाले की नई परतें खोल कर रख देगा।

राजीव सक्सेना के बाद दूसरा सबसे बड़ा और शातिर आर्थिक अपराधी है दीपक तलवार। दीपक तलवार की पिछली सरकार में पहुँच इतनी ज्यादा थी कि यह विभिन्न रक्षा सौदों में भी संलिप्त था।

■ कौन है दीपक तलवार?
दीपक तलवार के ऊपर भी मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं। ED के अनुसार उसने एनजीओ के जरिए 90 करोड़ रुपए से ज्यादा के फंड का दुरुपयोग किया है। इस मामले में जांच शुरू होने पर तलवार दुबई भाग गया था। उसके खिलाफ भारत में 1000 करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्ति छुपाने की जांच भी चल रही है। इसी बीच एक दूसरे मामले में तकवार का दुबई छोड़ने पर प्रतिबंध लग गया था। इसके बाद मोदी सरकार की स्पष्ट नीतियों के चलते तलवार को वापस लाया जा रहा है।

■ इस गिरफ्तारी के क्या मायने हैं?
दरअसल ऑगस्टा वेस्टलैंड घोटाला भारतीय इतिहास के घोटालों की लिस्ट में एक बड़ा घोटाला है। इसके अंतर्गत वो लोग भी आये हैं जिनके गिरेबान तो छोड़िए, नाम लेने से भी अधिकारी डरते थे। ये देश के बदलते हुए चेहरे का प्रतीक है। ये तीन गिरफ्तारियां उन लोगों को सलाखों के पीछे करवाने में अहम भूमिका निभाएंगी जिन्होंने देश को भ्रष्टाचार के दलदल में धकेल दिया है। 

विभिन्न लोगों के अपने राजनैतिक विश्लेषण हो सकते हैं लेकिन एक बात तो तय है। देश लूटकर भाग जाने वाले लोगों में जिस डर का माहौल पैदा हुआ है वह देख कर जनता ज़रूर खुश हो रही होगी। जनता के बीच यह स्पष्ट सन्देश गया है कि देश के भीतर एक बेहतर व्यवस्था स्थापित हुई है। अब भारत का नागरिक सच में सीना ठोक कर बोल्ड और कैपिटल लेटर्स में ‘INDIAN’ लिख सकता है, क्योंकि भारत मे दुनिया को एक सन्देश दिया है कि भारत को लूटने वालों को खुली छूट नहीं मिलने वाली है। सबका हिसाब किया जाएगा।

Source: InReportCard

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