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कोरोना मरीज को बेड दिलाने के लिए कुमार विश्वास ने IAS को किया फोन, जवाब मिला- कवि हैं, कवि रहिए

देशभर में कोरोना महामारी की दूसरी लहर में अचानक बढ़ी संक्रमितों की संख्या के कारण पूरे देश के हॉस्पिटल में बेड की किल्लत हो गई है। लगभग सभी अस्पतालों में केपेसिटी से ज्यादा मरीज भर्ती है। उत्तरप्रदेश में भी स्थिति देश के अन्य राज्यों जैसा ही है। आम आदमी तो छोड़िए, बड़े बड़े शख्सियतों, मंत्री और विधायकों को भी हॉस्पिटल में एक बेड पाने के लिए काफी मसक्कत करनी पड़ रही है। कुछ ऐसे मामले भी सामने आए है जिसमे अस्पताल में बेड की गुहार लगाने के अधिकारियों को फ़ोन लगाया जाता है तो सहानुभूति की जगह लोगों को दुत्कार दिया जाता है।

कुछ इसी तरह का बर्ताव हिंदी के प्रसिद्ध कवि कुमार विश्वास के साथ भी हुआ है। जिसका जिक्र उन्हीने अपने ट्विटर एकाउंट के माध्यम से किया। आपको बता दे, कुमार विश्वास इन दिनों कोरोना संक्रमितों की मदद के लिए सोशल मीडिया पर कई दिनों सक्रिय है और लोगों से जरूरतमंदों तक मदद पहुचाने की अपील कर रहे है। इस मुहिम में उन्होंने कई बार वरीय अधिकारियों को भी किया है।

मंगलवार को जब कवि कुमार विश्वास ने एक कोरोना मरीज को बेड दिलाने के लिए यूपी के आईएएस अधिकारी को फ़ोन किया तो अधिकारी ने उन्हें बेहद ही बेरुखे अंदाज में कहा कि आप कवि हैं, कवि रहिए और सरकार को अपना काम करने दीजिए।

कुमार विश्वास ने अपने साथ हुई इस घटना की जानकारी सोशल मीडिया वेबसाइट ट्विटर के जरिये साझा किया है। कुमार विश्वास ने ट्विटर पर लिखा “मदद/आपूर्ति का संतुलन बिगड़ रहा है।आज UP के एक IAS ने फ़ोन पर कहा “कौन हैं आप?MP हैं,मंत्री हैं या मेरे सीनियर हैं जो मैं आपके बताए मरीज़ को बेड दिलाऊँ?कवि हैं कवि रहिए,किसे बेड देना है किसे नहीं सरकार को पता है” ख़ैर मरीज़ को बेड तो किसी से दिला दिया पर उनकी मजबूरी भी जायज़ है”

इसके अलावा कुमार विश्वास ने लिखा कि उनकी गलती नहीं, वे तो मशीन का बस एक पुर्ज़ा हैं। जब मशीन ही ठप्प हो गई तो पुर्ज़े के खड़खड़ाने का क्या रंज। दिनभर कॉल करने पर लोग, डॉक्टर, अधिकारी, समाजसेवी मदद कर ही रहे हैं। कभी-कभी किसी को बचा नहीं पाते तो उस दिन ख़ुद की बेबसी पर ग़ुस्सा-तरस आता है।