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2014 में मोदी-NDA के साथ थी 27 पार्टिया- अबतक 16 दलों ने छोड़ा साथ, अब मात्र 6 का साथ रह जाने का सत्ता रही चिंता..

जैसे-जैसे 2019 का लोकसभा चुनाव नजदीक आ रहा है और केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार का कार्यकाल पूरा होने को है, वैसे-वैसे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की ताकत कमजोर होती जा रही है क्योंकि एक-एक कर धीरे-धीरे एनडीए के 16 घटक दल गठबंधन छोड़ चुके हैं। अभी भी एनडीए के पांच घटक दल भाजपा पर दबाव बनाए हुए हैं और गठबंधन छोड़ने की दबी जुबान से चेतावनी दे रहे हैं।

बता दें कि साल 2014 के चुनावों में भाजपा ने 28 दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। उन चुनावों में भाजपा को 282 और 22 घटक दलों को कुल 54 सीटें मिली थीं। चुनाव के बाद भाजपा ने कई छोटे-छोटे दलों को एनडीए में शामिल करवाया था। इससे एनडीए के घटक दलों की संख्या बढ़कर 42 हो गई थी। अभी हाल ही में असम गण परिषद (एजीपी) ने नागरिकता (संशोधन) बिल के विरोध में एनडीए छोड़ दिया है।

साल 2018 एनडीए के लिए सबसे बुरा रहा क्योंकि कई बड़े क्षेत्रीय दलों ने गठबंधन को अलविदा कर दिया। साल के शुरुआत में ही बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी की पार्टी हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) ने एनडीए छोड़कर विपक्षी महागठबंधन का हाथ थाम लिया।

फरवरी, 2018 में ही नागालैंड विधान सभा चुनाव के दौरान एनडीए के पुराने सहयोगी नगा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) ने 15 साल पुराने रिश्ते को खत्म कर दिया। अगले ही महीने यानी मार्च, 2018 में आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू की पार्टी तेलगु देशम पार्टी (टीडीपी) ने भी एनडीए को अलविदा कह दिया। नायडू आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा नहीं दिए जाने से भाजपा से खफा थे।

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