Saturday, March 28, 2020
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120 रुपये की सरसों तो सरसों का तेल 100 रुपये का कैसे ? जानकर सर पकड़ लोगे !

आज का मुद्दा है 120 रुपए की सरसों आई तो 100 रुपए का सरसों का तेल कैसे मिल जाता है ? आप अपने पास मोहल्ले की दुकान पर, किसी शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में ग्रॉसरी शॉप पर, मॉल में बड़े बड़े ब्रैंड के किराना स्टोर में जाते हैं. दुकानदार या स्टोर हेल्पर से कहते हैं भैया-सरसों का तेल देना. वो कहता है फलां तेल 120 रुपए का है, लेकिन ये दूसरी कंपनी का ये सरसों का तेल भी अच्छा है ये 100 रुपए का है.

आप दाम कम देखते हैं, बोतल में पीला पीला तेल देख सरसों का तेल समझते हैं. और खरीद लाते हैं. लेकिन हर पीला दिखने वाला तेल शुद्ध सरसों का तेल नहीं है. क्योंकि देश में सरकार से मिली एक छूट का फायदा उठाकर मुनाफाखोर अपनी लूट को मिलाकर,आपकी सेहत का तेल निकालने की दुकानदारी कर रहे हैं.

मिलावटखोरों ने सरसों के तेल की जगह एसेंस मिलाकर ब्रान, पॉम या सोया ऑयल खिलाना शुरू कर दिया है। यही वजह है कि सरसों महंगा होने के बाद भी सरसों का तेल सस्ता है। तिल का तेल को मिलना ही दूभर हो गया है। पूजा के नाम पर  तिल का तेल 150 रुपये लीटर के भाव बिकता है मगर इस पर स्पष्ट लिखा होता है कि यह अखाद्य है। इसी तरह बेसन में चावल की खुद्दी की मिलावट हो रही है। डॉक्टरों की मानें तो मिलावटी तेल  खाने से लोगों की लीवर खराब हो रहा है। यही वजह है कि पेट से संबंधित रोगों के मरीज कई गुना बढ़ गए हैं।   
सरसों का भाव मौजूदा समय 36 रुपये किलो है मगर तीन किलो सरसों से तैयार होने वाला एक लीटर तेल महज 95 रुपये लीटर के भाव बिक रहा है। यह समझ से परे है कि कोई कारोबारी 108 रुपये का सरसों पेरवा कर 95 रुपये प्रति लीटर के भाव से कैसे बेच रहा है। तेल पेरने वाले मोहद्दीपुर के मिलर महेश अग्रवाल बताते हैं कि तीन किलो पीली सरसों पेरने पर एक लीटर शुद्ध सरसों का तेल निकलता है। पेराई पांच से आठ रुपये लीटर तक ली जाती है। ऐसे में सरसों पेरवाकर तेल तैयार करने पर 120 रुपये की लागत आती है। मुनाफा लेकर मिलर इस शुद्ध तेल को 150 रुपये लीटर या 130 रुपये किलो के भाव से बेचते हैं।


बाजार में पैक्ड तमाम तरह के सरसों के तेल 95 रुपये लीटर के भाव से बिक रहे हैं। जानकार बताते हैं कि बड़ी कंपनियां राजस्थान आदि में जहां सरसों की भरपूर पैदावार है, वहां से तेल पेरवाकर टैंकर से लाती हैं और खली को भी प्रोसेस कर बचा खुचा तेल निकाल लेती हैं। मगर कई लोकल मिलावटखोर इसी भाव में तेल कहां से बेचते हैं, यह लोगों की समझ से परे है। बाजार के सूत्रों का कहना है कि बाजार में सरसों के तेल का एसेंस बिकता है। इसी एसेंस को पॉम, सोया या ब्रॉन ऑयल में मिलाकर बेचा जाता है। पैक्ड तेल सस्ता बेचने वाले भी तीन महीने तक तेल को सुरक्षित रखने के लिए इसमें एसेंस मिलाते हैं। पॉम, सोया व ब्रॉन आयल 70 रुपये लीटर के भाव से मिल जाता है। महज एक बूंद एसेंस मिलाने पर दो लीटर तेल तैयार हो जाता है। इस तरह से मिलावटखोर 20 से 25 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से मुनाफा कमा रहे हैं।   


चोरी छुपे बिकता है एसेंस
सोया, पॉम या ब्रान ऑयल को सरसों के तेल में बदलने वाला एसेंस बाजार में चुनिंदा दुकानदारों के यहां बिकता है। इसे आम ग्राहक नहीं खरीद सकते। खरीदारों को यदि दुकानदार जानता हो तो ही मिलेगा। एसेंस बेचते समय गोपनीयता का पूरा खयाल रखा जाता है। यदि किसी कारोबारी ने सूचना लीक कर दी तो पूरे बाजार में उसे इसके बाद एसेंस नहीं मिल सकता है। 

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