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इजरायल के 13 खिलाड़ियों को मारा था फलिस्तीनी आ’तंकियों ने, इजरायल ने चुन चुन कर लिया था बदला

हर आ’तंकी हमले के बाद हमारी सरकार कड़ी निंदा कर देती है और कड़े कदम उठाने की बात करती है। कड़े कदम उठाने के मामले में भारत को अपने मित्र देश इजरायल से सीखना चाहिए कि किस तरह जब उसके खिलाड़ियों पर फलिस्तीनी आ’तंकियों ने कहर ढाया था तो इजरायल ने चुन चुन कर आ’तंकियों से बदला लिया था। 

1972 जर्मनी के म्यूनिख शहर में ओलम्पिक चल रहा था। दुनिया भर के देशों के खिलाड़ी इसमें हिस्सा लेने आये थे। खेल शुरू हुए एक हफ्ते बीत चुका था। जब सब कुछ पुरे उल्लास के साथ चल रहा था, किसी को नहीं पता था की आने वाले दिनों में गेम्स विलेज में कुछ ऐसा होने वाला है जो खेलों के इतिहास में काले अध्याय के रूप में दर्ज हो जाएगा। 5 सितम्बर 1972 को ट्रैक सूट पहने खिलाडियों के वेश में 8 लोग गेम्स विलेज की दीवार फांदने की कोशिश कर रहे थे। वहां से गुज़र रहे कनाडा के खिलाड़ियों ने समझा कि वो किसी और देश के खिलाड़ी है। उन्होंने उन अजनबियों की दीवार फांदने में मदद कर दी। अजनबियों की मदद कर कनाडा के खिलाड़ी तो आगे बढ़ गए लेकिन वो अजनबी उस इमारत के पास पहुंचे जहाँ इजरायल के खिलाड़ी ठहरे हुए थे। इमारत में दाखिल होते ही उन्होंने अपने हथियार निकाले और अपने मिशन को अंजाम देने निकल पड़े। दरअसल वो अजनबी फलस्तीन लिबरेशन ऑर्गेनाइजेशन के आ’तंकवादी थे।

आ’तंकियों ने एक एक कर के इजरायली खिलाड़ियों को मा’रना शुरू कर दिया। कुछ खुशकिस्मत खिलाड़ी बच कर भागने में कामयाब हो गए लेकिन कुछ खिलाड़ी अपने साथियों को बचाने के लिए आ’तंकियों से भिड गए। दुनिया भर के मीडिया में खबर आई कि फलिस्तीनी आ’तंकियों ने 11  इजरायली खिलाड़ियों को बंधक बना लिया है और बदले में 234 फ़लिस्तीनियों को रिहा करने की मांग कर रहे हैं। हालाँकि आतंकियों ने 2 खिलाड़ियों को मा’र दिया था लेकिन बाहर ये खबर नहीं थी। इजरायल ने किसी को रिहा करने से मना कर दिया। आ’तंकियों ने 2 खिलाड़ियों के श’व बाहर फेंक दिए ये जताने के लिए कि अगर मांग नहीं मानी गई तो बाकी खिलाड़ियों का भी यही हाल होगा। पुरी दुनिया इजरायल की और टकटकी लगाए देख रही थी। तभी आ’तंकियों ने जर्मनी के सामने मांग रखी कि उन्हें यहाँ से निकलने दिया जाए और साथ में बंधक भी ले जायेंगे। जर्मनी ने एक प्लान बनाया और आ’तंकियों की बाते मान ली। प्लान था कि आ’तंकी होटल से निकल कर एअरपोर्ट जाने के लिए खुले में आयेंगे जहाँ उन्हें निशाना बनाने में आसानी होगी। आ’तंकियों के लिए बस उपलब्ध कराई गई और जगह जगह शार्प शूटर तैनात किये गए। एअरपोर्ट पहुँचते ही आ’तंकियों को निशाना बनाया जाने लगा। खुद को घिरा देख आ’तंकियों ने सभी बंधक खिलाड़ियों को मार दिया।

उसके बाद इजरायल ने बदला लिया और ऐसा बदला लिया जो हर किसी के लिए एक मिशाल है।  इजरायल ने एक मिशन बनाया और नाम दिया रैथ ऑफ गॉड’ यानी ईश्वर का कहर। इजरायली प्रधानमंत्री गोल्डा मेयर ने इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद को ऐसा मिशन चलाने को कहा जिसके तहत दुनिया के अलग-अलग देशों में फैले उन सभी लोगों के क’त्ल का निर्देश दिया, जिनका वास्ता ब्लैक सेप्टेंबर से था। सबसे पहले मोसाद ने ऐसे लोगों की लिस्ट बनाई, जिनका संबंध म्यूनिख नर’संहार से था। इसके बाद ऐसे एजेंट्स तलाशे गए जो गुमनाम रह कर ऑपरेशन रैथ ऑफ गॉड को अंजाम देने के लिए तैयार थे। इन एजेंट्स से साफ़ कहा गया कि उन्हें सालों तक अपने परिवार से दूर रहना होगा, अपने मिशन के बारे में परिवार को भी नहीं बता सकते। पकड़े जाने पर इजरायल उन्हें पहचानने से भी इनकार कर देगा।

अगले 20 सालों तक चुन चुन कर इस नर’संहार में शामिल आ’तंकियों को इजरायल ने मारा। मिशन 20 साल तक चला। अलग अलग देशों में जा कर आ’तंकियों को मारा गया। 28 जून 1973 को मोहम्मद बउदिया को उसकी कार ब’म लगाकर उड़ा दिया।15 दिसंबर 1979 को दो फलस्तीनी अली सलेम अहमद और इब्राहिम अब्दुल अजीज की साइप्रस में मा’र डाला गया। 17 जून 1982 को म्यूनिख हत्याकांड में शामिल दो आ’तंकियों को इटली में अलग-अलग हम’लों में मा’र दिया गया।21 अगस्त 1983 को ममून मेराइश एथेंस में मा’र दिया गया
10 जून 1986 को ग्रीस की राजधानी एथेंस में फलस्तीन लिबरेशन ऑर्गेनाइजेशन का महासचिव खालिद अहमद नजल मा’रा गया।21 अक्टूबर 1986 को मुंजर अबु गजाला को काम ब’म से उड़ा दिया गया। 20 साल चले ऑपरेशन में म्यूनिख हत्या’कांड सभी गुनाहगारों को मा’र डाला गया।

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